प्रकम्पन

लोग जहाँ पर रहते है|
उस जगह को वो घर कहते है|
हम जिस घर मे रहते है|
उसे प्यार का मंदिर कहते है|

ये एक पुराने फिल्म की कुछ पंक्तियाँ है | जिस मे लिखा है कि घर और मंदिर अलग जरूर है पर जहाँ प्यार, सदभावना है वह घर भी मंदिर बन सकता है | मन से निकलने वाले संकल्पों की ऊर्जा अविरत हमारे आसपास तथा वातावरण मे फ़ैल रही है | देखा जाए तो किसी मकान को बनानेवाला builder रेत, ईट, सिमेंट भले किसी भी दर्जे का use करे परंतु उस मकान को घर, पाठशाला, व्यायामशाला, मधुशाला या मंदिर बनाना है वह तो उस जगह पर रहने वाले इन्सान की सोच पर निर्भर है |

आपने इस बात का अनुभव किया होगा कि हर घर के प्रकम्पन अलग-अलग होते है | यही नही परंतु हर व्यक्ति के हर दिन के, हर वक्त के प्रकम्पन भी अलग हो सकते है क्योंकि इन्सान की हर परिस्थिती की प्रतिक्रिया या सोच भी अलग होती है | आज कोई हमारे लिए अच्छा सोच रहा है तो उसके चेहरे से, आँखों से _____ जो प्रकम्पन निकलते है वह सकारात्मक महसूस होते है परंतु वही सोच अगर बुरी हो जाए तो नकारात्मक प्रकम्पन भी feel होते है |

कहते है ध्वनी से ज्यादा प्रकाश का वेग होता है | शब्दों से ज्यादा हमारे भावों का अर्थात संकल्पों का वेग है | आपने देखा होगा आजकल call करके बात करने के बजाए लोग message या whatsApp करना पसंद करते है | कोई इन्सान विश्व के किसी भी कोने में हो लेकिन आज उनके साथ सम्पर्क रखना बड़ा आसान हुआ है | विज्ञान ने इतने प्रभावी साधन हमे बनाकर दिए है, लेकिन मनुष्य का मन कई साधनों से भी प्रभावशाली है| मनुष्य किसी के लिए दिल से दुआ करता है, वह विचारों के प्रकम्पन उस इन्सान तक पहुँचते जरूर है | इन दुआओं का बल उसे कार्य मे सफलता दिलाता है | यही अगर बद्दुआ हो तो व्यक्ति को बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है | इसलिए जब कोई समस्या आती है तो हम अपने नजदिक के संबंधियों को कहते है ‘ मेरे लिए दुआ करो कि ______’ दुआ दवा का काम करती है |

संकल्पों का प्रवाह पानी की तरह है | नदी एक दिशा मे निरंतर चलती है तो उससे सुख मिलता है | वही अगर अपनी सीमाओं को तोड़कर बहने लगे तो तबाही मचाती है | वैसे ही अपने विचार शांत और एक दिशा मे चले तो वह खुद को और औरों को सुख देते है, वही विचार, जोशभरे, दुर्भावनाओं से भरे हो तो वह अपने और औरों के जीवन को नुकसान पहुँचा सकते है | हमारी सोच किसी व्यक्ति के लिए जैसी होती है उसी अनुसार उस व्यक्ति के मन मे हमारे लिए वैसी सोच बन जाती है |

एक राजा और उसका एक मित्र था | मित्र का लकड़े का व्यापार था | एक बार वह अपने लकड़े के कारखाने मे गया | देखा बहुत सारे चंदन के लकड़े पड़े है | उनको देखकर सोच चली की इतने सारे लकड़े कैसे बेचे जायेंगे | फिर उसके अंदर अचानक सोच चली कि इस शहर की कोई नामीग्रामी हस्ती मर जाए तो मेरे लकड़े बेचे जायेंगे | उसको राजा का चेहरा दिखाई देने लगा | बार-बार उसके मन मे चलता था कि राजा की मृत्यू हो तो मेरे चंदन के लकड़े ख़त्म हो जायेंगे | राजा की मृत्यू हो , बार-बार यह विचारों का चक्र चलने लगा | वहाँ राजा भी सोचने लगा कि मेरे मित्र की इतनी सारी जायदाद है | इस के बाद उसे संभालने वाला वारिस कोई नही | अगर इसकी मृत्यू हो जाए तो सारी प्रॉपर्टी मेरे खजाने में जमा हो जाएगी | इसकी मृत्यू हो जाए______ राजा के मन मे बार-बार उसके मृत्यू के संकल्प चलने लगे | दोनो भी दूर रहकर एक दूसरे की मृत्यू के लिए सोचने लगे |

एक बार एक कार्यक्रम मे दोनो आमने-सामने हो गये | दोनों के अंदर चलने वाली सोच के कारण नजर से नजर मिलाना भी मुश्किल हो गया | बातचीत करते हुए भी अंदर विचारों का चक्र चल ही रहा था, फिर न रहकर दोस्त अपनी बात राजा को बताता है | राजा को आश्चर्य लगता है, वह भी अपनी दिल की बात बताता है | दोनो शर्मशार हो जाते है | राजा के मन मे सोच चलती है, वह अपने मित्र को कहते है ‘ मित्र, एक उपाय है | मै तुम्हारे चंदन के सारे लकड़े खरीदकर इससे एक मंदिर का निर्माण करता हु ’ यह सूनकर मित्र कहता है ‘ मै आपके ही दिए हुए धन से उस मंदिर की मूर्ति के निर्माण मे लगाता हु ’ | दोनो भी एक-दूसरे की सोच से संतुष्ट हो जाते है | धन की प्राप्ती और सदुपयोग से दोनों के मन तृप्त हो जाता है |

भावार्थ : – जैसे हमारे सोच के प्रकम्पन होंगे वही दूसरे की सोच बनती है इसलिए अपनी सोच तथा भावों को बदले |

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