आध्यात्मिकता और ज्योतिष

मनुष्य जीवन अनेकानेक शुभाशुभ घटनाओं से भरा है| इन घटनाओं की प्रसंगों की शृंखला बनी रहती है| हर प्रसंग रहस्यों से भरा हुआ है| कई बार मनुष्य की बुद्धी उन बातों को समझ नहीं पाती, उस तर्क-वितर्क से बाहर निकलने के लिए फिर ज्योतिष विद्या का सहारा लेती है| जन्म, नौकरी, शादी, उन्नति या फिर कोई धन, सम्बन्ध …… की बाते हो, आनेवाला कल मेरा क्या होगा? ये जानने की उत्सुकता लेकर ये कमजोर मन उस दिशा में चला जाता है| लगता है कि कोई अनिष्टकारी ग्रह उनके वैवाहिक जीवन,नौकरी, क़ानूनी मामलों, व्यापार, पढाई, उन्नति, परीक्षा या करिअर में मिलनेवाली सफलता को बाधित कर रहा है| ऐसे समय पर अगर पूजा-पाठ करवाने की या कोई ग्रह की अंगूठी पहनने की सलाह दे तो वह भी स्वीकार कर लेते है|
भौतिक ग्रह और नक्षत्र, विभिन्न उर्जाओं के प्रतिक है| जब खगोलीय उर्जाओं का संजोग होता है तो एक नईं उर्जा उत्पन्न होती है जिसका प्रभाव सारे सृष्टीपर तथा हरेक के जीवनपर पड़ता है| यदि इन उर्जाओं का ज्ञान पाकर हर परिस्थिति को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखे तो यही ज्ञान आत्मउन्नति का शक्तिशाली साधन बन सकता है|
कहा जाता है ‘ life is an Examination Hall’| हर आत्मा को अपने जीवनकाल में कुछ सबक सीखकर आगे बढ़ना होता है| जब तक वह नहीं सिखती तब तक वही-वही परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है| जैसे शरीर में अगर रोगप्रतिकारक शक्ति कम हो जाए तो बार-बार बुखार या सर्दी-खाँसी होती रहती है वैसे ही जीवन में उन्ही बातों से बार-बार झुंझना पड़ता है|
व्यक्ति की जन्मकुंडली ग्रहों की स्थिति को चिन्हित करती है जिस पल आत्मा नए शरीर के रूप में जन्म लेती है| यह कुण्डली आत्मा की कर्मकहानी दर्शाती है| आत्मा को मिला हुआ शरीर रूपी वस्त्र सुन्दर है तो समझा जाता है कि कुछ पुण्य साथ में लेकर आये है परन्तु अगर वह त्रुटीयोंवाला है तो पिछले कर्मों का हिसाब साथ में लाए है| इसके साथ-साथ आत्मा को इस जीवनकाल में कौन से अनुभव प्राप्त होंगे, जो शिक्षाए प्राप्त करनी है उसका तरीका आसान होगा या मुश्किल यह भी समझ पाते है| मान लो कि कोई ग्रह मंगलकारी है तो यह संकेत है कि आत्मा पूर्व जन्म में बहुत से सबक सीखकर आई है अगर वह अनिष्टकारी है तो परिस्थितिओं द्वारा वह सबक दक्षता पूर्वक सीखने होंगे इस इशारे को समझना है|
‘life after life’ के लेखिका कहते है कि जब कोई अचेतन (कोमा) की अवस्था में कई सालों से है, उसे अपने जीवनकाल में जो सीखना था realised करना था वह नहीं किया है तो उसे ये मौका मिला है कि उन गलतियों को महसूस करे| अगर महसूस कर लेते है तो उस शरीर से मुक्त हो जाते परन्तु स्वीकार या सीखने की शक्ति नहीं है तो दोबारा उसी शरीर में जागृत होकर उनको सीखना अनिवार्य है| जैसे हर विद्यार्थी को हर कक्षा की जो भी शिक्षाए है उसे ग्रहण कर आगे बढ़ना होता है| कोई फेल हो जाता है तो उसे दोबारा उसी कक्षा की परिक्षाए देनी पड़ती है वैसे ही जीवन भी एक पाठशाला के समान है, यहाँ पर भी सभी को सीखना है|
जो हो रहा सब अच्छा है
हमारी जन्मकुण्डली हमारी आन्तरिक शक्तियों का मापदण्ड देती है| आनेवाली समस्याओं का डट के सामना कर पाएंगे या डर जाएंगे| मान लो हमारे सामने करिअर को लेकर या फिर संबंधो को लेकर कोई बात आयी है उसके प्रति सुझाव प्राप्त करने ज्योतिषी के पास गये, वह हमें कहे कि इस वक्त आपका इस स्थान का ये ग्रह वक्री है आप हर कदम सोच समझकर ऊठाना ……… जब ऐसी बाते सुनते है तो उसका पहला असर हमारे मनपर होता है | डर पैदा होने के कारण उसका परिणाम शरीरपर, व्यवहार पर …….. होने लगता है| जीवन में आई हुई किसी भी बात को हम अनदेखा करे या उससे भागने की कोशिश करे तो वह टल जाएगी ऐसा नहीं लेकिन उसको स्वीकार करना तथा तटस्थता और निष्पक्षता का गुण धारण कर उस परिस्थिति को अलग-अलग पहलू से देखने का नजरिया बढ़ाना चाहिए| हर बात को आध्यात्मिक दृष्टी से देखे तो यही मन में गूंज ऊठेगा कि ‘जो हो रहा है अच्छा है’| हर घटना हमें अनुभवी तो बनाती है साथ-साथ हमारे अन्तर के पट भी खोलती है|
सकारात्मक उर्जा
जब मनुष्य परिस्थितियों के घेरे में आ जाता है तब उसे कोई मंत्र का उच्चारण या किसी विशिष्ट रत्न की अंगूठी या फिर कोई रंग के वस्त्र या चीजों का प्रयोग …….. अनेकानेक बातों की सलाह दी जाती है जिस से उस परिस्थिति का असर कम हो जाए| जो भी साधन अपनाए जाते है वह सारे प्रतीकात्मक रूप है| उनके इस्तमाल से मन व्यर्थ या नकारात्मक भावों से बचकर सकारात्मक बन जाता है परन्तु इनका परिणाम अल्पकालिन है| समझो किसी को व्यर्थ या नकारात्मक सोचने की लत लगी हो तो वह कुछ भी पहने या ओढ़े परन्तु इन साधनों का उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ सकता| आध्यात्मिकता अर्थात ही जो इन ऑखो से देखकर असंतुष्ट हो जाते है उन्ही को मन की ऑखो से देखकर उसके सत्य की खोज में गहरे उतरना| जिस सत्य को समझकर मन में उठनेवाले हर तुफान को शांत कर सको| हर घटना का नकारात्मक रूप न देख उस से अच्छाई को ढूंढ वह चित्त में रख आगे बढ़ते जाना|
हमारे मन में अद्भूत शक्तियाँ है| हर विचार हमें नया जीवन दे सकता है इतना विचारों में बल है| इसलिए मनोवैद्यानिक भी इस बात की पुष्टी देते है कि ‘जैसा हम सोचते है वैसी परिस्थितियों को, व्यक्तियों को …… आकर्षित करते है’| विचारों की धारा नकारात्मक दिशा में प्रवाहित है तो वैसे ही लोग सम्पर्क में आएंगे, वैसी ही घटना होती रहेगी| समझो कोई लगातार ‘मै बिमार न हो जाऊ …. ’ ऐसा सोचता है तो वह सच में बिमार पड़ जाता है परन्तु बिमारी अवस्था में भी अगर कोई खुश रहता है, उमंग भरी सोच रखता है तो वह उस अवस्था से जल्दी बाहर निकलता है| इसलिए बात कोई भी हो परन्तु मनुष्य अपनी सकारात्मक सोच से हर परिस्थितियों पर विजय प्राप्त कर सकता है| असंभव कार्य संभव हो सकते है, सिर्फ सोच पर ध्यान देना जरुरी है|
आन्तरिक विकास का मार्ग
एक ही स्थान और समय पर जन्म लेनेवाली दो आत्माओं की जन्मकुंडली एक जैसी हो सकती है लेकिन उनका जीवन भिन्न हो सकता है| क्योंकि हर आत्मा की यह व्यक्तिगत यात्रा है| इस यात्रा में हर एक के पास की पूंजी, विकास का स्तर, सोचने का ढंग अलग है| मिली हुई उपलब्ध उर्जाओं को अभिव्यक्त कैसे कर रहे है? ज्योतिष की भूमिका मात्र इतनी है कि वह मार्गदर्शक बन जागरूकता, साहस, चुनाव और शक्ति के साथ चलना सिखाता है| परन्तु हमारे आन्तरिक स्तरपर काम करने तथा आत्मविकास करने की उपलब्धि प्राप्त करने का चुनाव पूर्णतः व्यक्तिगत है| हमें सशक्त बनना है या निर्बल, यह तो हमारे हाथ में है|
हमारे जीवन में परमात्मा की भूमिका
कई मनुष्य इस मान्यता को लेकर चलते है कि भगवान की कृपा होगी तो हमारे जीवन का दु:ख, परिस्थितियां खत्म हो जाएगी इसलिए विशेष किसी देवी-देवताओं की पूजा या कोई विशेष मन्त्र उच्चारण कर उन्हें खुश करने का प्रयास किया जाता है| परन्तु परमात्मा ऐसे खुश हो सकते है? कहते है ‘जीवन में जब कोई दु:ख आता है तो समझना चाहिए कि अच्छे कर्म करने की सक्त जरूरत है’|
परमात्मा की कृपा हमारे ऊपर तब हो सकती है जब हम उनके बताए हुए मार्ग पर चले| उन्होंने दी हुई मत का पालन करे| सच्चाई की राह पर चल सत्कर्म करे इसलिए कहते है ‘सच्चे दिल पर साहेब राजी’| परमात्मा एक अच्छा टिचर भी है तो गाइड भी है| क्या करना चाहीए क्या नहीं उसकी समझ जरूर देता है लेकिन हमारे कर्मो में तथा भाग्य में दखल अंदाजी नहीं करता| अगर भगवान ही सभी का भाग्य बनाता है फिर सब का एक जैसा क्यू नहीं? कोई अमीर तो कोई गरिब, कोई बुद्धीवान तो कोई बुद्धीहीन …… क्यू है? वास्तव में हम ही हमारे भाग्य के निर्माता है|
आध्यात्मिकता और ज्योतिष इन में फर्क इतना है कि आध्यात्मिकता हमें खुद को बदलने की, आत्मपरिक्षण करने की प्रेरणा देती है| ‘खुद बदलो, जग बदलेगा,’ ‘स्व-परिवर्तन से विश्व परिवर्तन’ कहते है| हम अपने अंदर झाँकना सिखते है| आध्यात्मिक ज्ञान से जीवन के जटिल सवालों के जवाब मिल जाते है| जीवन को सही तरीके से देखता और जीना सिखाती है| ज्योतिष विद्या हमारे जीवन में आनेवाले कुछ पलों की थोडीसी आहट जरूर देती है परन्तु परिस्थितियों को परिवर्तन करने के बाहरी इलाज बताती है| स्वयं पर मेहनत करने के बजाय हम व्यक्ती या समस्याओं को बदलने की मेहनत करते| इस प्रयास में कभी निराशा का, असफलता का भी अनुभव होता है|
आध्यात्मिक पथ पर चलने वाला साधक परमात्मा का साथ पाकर, मिली हुई ज्ञान की रोशनी से उलझनों में भी सही मार्ग को भाँप लेता है| ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा और स्वयं पर दृढ़ विश्वास रखने से मनुष्य आनेवाली मुश्किलें को पारकर सफलता के शिखर पर पहुँच जाता है|

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