जीवन को मूल्यवान बनाये

वर्त्तमान समय को हम कलियुग कहते है, जहा भ्रष्टाचार, अत्याचार, दुराचार…. दिखाई देता है| ऐसे समय पर कोई हमें सत्यता, सहनशीलता, ईमानदारी का पाठ पढाये तो हम उसे कहते है, ‘भाई,ये कलियुग है, यहाँ जीना है तो झूठ तो बोल्नाही पड़ेगा, आवाज उठानाही पड़ेगा, विरोध करना ही पड़ेगा…. ‘अर्थात यहा पर शान्ति, अहिंसा की बाते सिर्फ किताबो में ही बंद करके रखनी पड़ेगी| हम महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल…. ऐसे कईयोँ के जीवन की बाते सुनते है, सुनते है लेकिन वाही बाते अपने जीवन में लानी है तो वहा कतराते है| क्या हम मूल्यों के साथ जी सकते है? ‘सत्यमेव जयते’ के नारे लगाये जाते है लेकिन सत्यता की रह पर चलना आज हमें मुश्किल लगता है| कई पोराणिक कथाओ में ‘सत्य की विजय’ होते हुए दिखाते है लेकिन व्यावहारिक जीवन में उसका अनुभव करने में कदम पीछे हट जाते है| क्यों हमें ये रह मुश्किल लगती है|
जैसे पुराने ज़माने के लोग तन-मन से मजबूत हुआ करते थे| उनके जीवन की कुछ धारणाए होती थी| भले गरीबी में दिन बिताते थे लेकिन किसी की रोटी छिनकर खाना पसंद नहीं करते थे| मेहनत करेंगे लेकिन रिश्वतखोरी नहीं करेंगे ऐसी कई बाते उनमे देखि जाती थी| अभी समय के साथ बहुत कुछ बदल गया| अब हर जगह, हर क्षेत्र में झूठ-कपट दिखाए देता है|और उस रस्ते पर चलनेवालो के पास नाम, मान, शान देखकर कईयोंको लगता है की यही सही तरीका है|लेकिन गलत रास्तो से कमाया हुआ कुछ भी ज्यादा समय सुख नहीं दे सकता| गलत कर्म करने में देरी नहीं लगती पर उसका फल,परिणाम बड़ा भयानक होता है| हम कर्म सिद्धान्त को भली -भाति जानते है| मगर इतने बेपरवाह हुए है की भ्रष्ट कर्म करके अन्दर सोच लेते है ‘जो होगा सो देखा जायेगा’|धैर्यता की कमी होने के कारण सबकुछ instant चाहिए| जैसे आजकल हमारा जीवन इतना तेजगति से दोड़ रहा है की कईयोंको भोजन बनाने के लिए भी फुर्सत नहीं इसलिए पदार्थो में भी instant जो बन सकता है वैसे पदार्थ खाना पसंद करते है| शरीर के लिए वह नुक्संकारक भी क्यों न हो लेकिन ‘समय कहा है?’ ऐसा बहाना बना लेते है| यह बात सिर्फ पदार्थो में नहीं लेकिन हर जगह करते है| पैसा कमाना है, उची पोजीशन पर जाना है,यहाँ तक की फल भी पेडपर जल्दी आ जाये उसके लिए भी क्या क्या करते है| हम सभी इसके अनुभवी है की फल को जल्दी पकाने के लिए, गे दूध ज्यादा दे उसके लिए भी मनुष्य गलत कर्म कर रहा है|क्या ऐसी चीजे खाकर हमें लाभ हो सकता है|
कभी सोचकर देखे की हमें जीवन में क्या चाहिए? धन, महल, गाड़ी, पद… ये सबकुछ हम कुछ भी करके हासिल कर लेंगे परन्तु रास्ता कोनसा अपनाया है, उस आधार पर ख़ुशी, सुख, सुगुण, शांति मिलेगी| अगर हमने किसी को धोखा देकर या नुकसान करके कुछ पाया है तो भले हमारे कृत्य किसीको पता भी न चले लेकिन अन्दर ही अन्दर वो चीज हमें सुगुण की नींद लेने नहीं देगी| शांति से जी नहीं सकते| मन लो हमने अपना थोडासा नुकसान करके किसीको सुख दिया होगा, किसीका भला किया होगा तो वह बात हमें आतंरिक ख़ुशी का एहसास कराएगी|कहते भी है ” किसीका भला करो तो तुम्हे लाभ होगा, किसीपर दया करो तो वह तुम्हे जिंदगी भर याद करेंगे ”
भारत देश महँ आत्मओंकी कर्मभूमि मणि जाती है| भारत माता ने गांधीजी, सुभाषचन्द्र बोस, विवेकानंद, शिवाजी महाराज… ऐसे कई सुपुत्रों को जन्म दिया| जिनके जीवन से श्रेष्ठ मुल्योंका ( गुणोंका ) दर्शन होता है|यही भूमि देवभूमि भी है श्रीकृष्ण, श्रीराम, श्री गणेश…. जिनके श्रेष्ठ चरित्र का गायन- पूजन किया जाता है| संत तुकाराम, नामदेव, ज्ञानेश्वर, रामकृष्ण परमहंस जैसी हस्तिय होकर गयी जिन्होंने अपने जीवन में कई कास्ट सहन करके भी अपने सिधान्तो को नहीं छोड़ा| यह सभी हमारे जैसे ही मनुष्य थे लेकिन ‘सादा जीवन उच्च विचार’ के धनि थे| आज उनकी प्रतिमाये राखी जाती है न की रावण, कंस, हिटलर की| आखिर अंत में जीवन का स्तर हमारी जीवन की धारणाओं से ही मापा जायेगा| हर एक इन्सान को भगवन की अदालत में अपने कर्मो का हिसाब देना पड़ेगा| कितना धन, महल, गाड़िया, पद… प्राप्त किया, उसका कोई महत्त्व नहीं लेकिन अच्छे कर्मों का खाता कितना जमा किया उसका हिसाब होगा|
हे मानव, अपनी जीवन की इस यात्रा को देख, हम भी कही इस अँधेरे में तो नहीं की किसीको क्या पता चलता है, कोण देखता है,? कोई हमें न भी देखे लेकिन हमारी ही अंतरात्मा गवाही देगी की क्या हमने किया है? अच्छाई की रह पर हजारो काटे होंगे लेकिन जीवन गुणों से महक जायेगा और बुराई के रस्ते पर काटे न भी हो लेकिन एक न एक दिन वह सूली पर चढ़ाएगा|इसलिए जीवन में गुणों को अपनाकर अपने आपको मूल्यवान बनाये|मूल्य ( value) से ही मूल्यवान ( valueable ) बन जायेंगे |

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मन मे गांठ बांध ले

मन मे गांठ बांध ले
वर्तमान समय किसी से बात करो तो पता चलता है की मन मे कई अतीत की बातो को लेकर ईन्सान परेशान, दुःखी है| व्यवहार मे किसी से कुछ अनबन हुई है, दुःख दिया है या फिर कई कारणो से उन लोगो के लिए गाठे बांधकर रखी है की ‘ऊनके साथ ऐसे ही चलेंगे, कभी माफ नही करेंगे..’ न जाने कितनी सारी गाठे| जितनी गांठे बांध लेंगे उतना ही उसका प्रभाव शरीरपर होता रहेगा| आज हर घर मे ऐसा कोई तो व्यक्ति होता है जिसको कॅन्सर, ट्यूमर जैसी बिमारी होते हुए देखते है| मन मे ऐसी जबरदस्त गांठ बांध लेते है, जो खुद के शरीर मे भी वह विचारो की गांठ हो जाती है| इसलिए आज विज्ञान कॅन्सर जैसी बिमारी को भी मनोदेहिक (psychosomatic) बिमारी मानता है| गलत, नकारात्मक बातो की गांठ बहुत सहज ही बांध लेते है परंतु एक बार बांधी हुई गांठ को छोडना बडा मुश्किल होता है| इसलिए संभालकर विचारो का प्रयोग करे|
‘गांठ बांध लेना’ इस बात का अर्थ किसी बात के लिए दृढ संकल्प करना| अगर भुलने की आदत है तो उस बात को याद रखने के लिए भी पल्लू को, रुमाल को गांठ बांधकर रखते है| जीवन मे कोई भी प्रकार का परिवर्तन करना है तो हमे भी गांठ बांधना जरूरी है| क्योकि बिना दृढता के कोई भी परिवर्तन साकार हो नही सकता| आज हर ईन्सान मे कोई न कोई बुराई, अवगुण या कमी है| कई तो उन कमीयो के साथ चलना ही पसंद करते है| कई तो अनेक बार संकल्प करके हार मान लेते है लेकिन विजयी वह बनते है जो ‘मन मे उस बात के लिए दृढता की गांठ बांध लेते है’| एक बार किया हुआ संकल्प तुरंत साकार हो ऐसा नही हो सकता लेकिन जो संकल्प किया है उसपर डटे रहना जरूरी है| उस परिवर्तन के संकल्प को रोज कई बार खुद को ही याद दिलाने से, दोहराने से ही वह प्रत्यक्ष रूप ले सकता है| क्योकि विचारो के कुछ नियम है जो प्रत्यक्ष रूप मे कार्य करते है|
‘Law Of Attention’ अर्थात जिस बातपर आप बार-बार ध्यान देते है वह जीवन मे आज नही तो कल घटते हुए दीखाई देता है यह नियम है| इसलिए जिस परिवर्तन को हम अपने जीवन मे लाना चाहते है उस बात पर ध्यान दे| ध्यान का मतलब एकाग्र होना भी है| कई बार हम कुछ ठान लेते है लेकिन कुछ समय बीतने के बाद वह संकल्प ढीला भी हो जाता है| खुद को अगर ढील दे दी तो फिर वह परिवर्तन होना मुश्किल लगता है| जीवन मे कुछ बनना चाहते है या कुछ कर दिखाना चाहते है उसके लिए दृढ संकल्प करे| जैसे किसी भी धागे मे लगी हुई गांठ को छोडना मुश्किल है वैसे अच्छे संकल्प को जब तक जीवन मे नही लाते तब तक उस गांठ को बांधकर रखना जरूरी है|
कई लोग अपनी मन्नते पुरी हो इसलिए मंदिर मे धागा बांधते है| समझते है की भगवान मेरी इच्छा को पुरा करेगा| लेकिन क्या ऐसे धागा बांधने से इच्छा पुरी होगी? उसके लिए जिगरी मेहनत, दृढ संकल्प का होना आवश्यक है| जैसे बच्चा merit list मे आना चाहता है तो उसे सिर्फ इच्छा नही लेकिन उसको उस संकल्प को पुरा करने के लिए उतनी मेहनत करनी पडती है| अपनी सोच और कर्म को समान बनाना होता है| अगर कोई कहे सोचेंगे, देखेंगे, करेंगे .. यह गे गे की भाषा इस्तमाल करने वाले कभी जीवन मे सफल नही हो सकते| अगर जीवन मे सफलता पानी है तो मन मे आज ही गांठ बांधले की ‘यह तो हम करके ही दिखाएंगे’| खुद को समय के बंधन मे बांधे की ‘इतने समय मे यह कार्य पुरा करके ही छोडेंगे’| ऐसे शक्तिशाली संकल्प की मन मे बांधी हुई गांठ आपको अपने लक्ष्य तक पहुचायेगी|

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रिश्ते बडे अनमोल

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जिसका अपने प्रति, समाज के प्रति कुछ उत्तरदायित्व है| सिर्फ खून के रिश्ते नही लेकिन हर एक के साथ हमे रिश्ते निभाने है| सुबह सुबह दरवाजे की घंटी बजाने वाले दूधवाला, पेपरवाला से लेकर ऑफिस, ट्रेन मे मिलनेवाले सभी के साथ अच्छे रिश्ते बनाने की जरूरत है| हम ये नही कह सकते की इनके साथ अच्छा व्यवहार करने की क्या आवश्यकता है? लेकिन नही, सब की हमे और सबको हमारी जरूरत है| साधारणसा कार्य करने वालों के साथ अच्छा व्यवहार, अच्छी बातचीत करते है तो वह भी समय पर मदद देने पहुच जाते है | आंखिर रिश्तो के बिना यह मनुष्य जीवन ही क्या ?
रिश्तो की गरिमा न जाननेवाले बडे आसानी से कह देते है की, ”मै अकेला जी सकता हू , मुझे किसी की जरूरत नही “ लेकिन सबसे जादा जरूरत उन्ही को लगती है | हमे हर रिश्ते की कदर करनी है | उसके लिए आवश्यक है हम हर एक को सन्मान दे | कोई ई न्सान छोटा या बडा नही होता, हमारी नजरिये से हम उसे बडा या छोटा बना देते है | जैसे हाथो की पाचो अंगुलिया अगर आपसमे लडने लगे की कौन सबसे बडा ? तो हर एक का महत्व अलग है ना | हम कहे ये सबसे छोटी, सबसे लास्ट वाली अंगुली न हो तो क्या फरक पडता है? लेकिन व्यावहारिक रित्या उसका होना ही इस हाथ की शोभा है| ऐसे ही समाज के हर वर्ग के तथा हर कार्य करनेवाले लोगो का महत्व है|
“रिश्तो मे भावना की सिलाई हो तो संबंध टिकते है लेकिन स्वार्थ हो तो टुटते है” | कितनी गहरी बात किसी ने कही है| ईन्सान को ईन्सान से जोडनेवाला ये स्नेहसेतू है| भावना ये स्वार्थ मे बदल जाये तो रिश्ते भी बदल जाते है| आज हर एक अपने आपसे ज्यादा प्यार करता है लेकिन औरों से प्यार है वह बताने का साधन है शब्द | इसका प्रयोग हम किस तरह से करते है, उसपर ध्यान रहे | आपनोट किजिये जब रिश्ते नये होते है तब सुसंवाद होता है | शब्द, भावनाये सब अच्छे होते है | जैसे जैसे आगे बढते है उसमे से सु गायब हो जाता है फिर संवाद बच जाता है | और थोडा समय बीतने पर सं भी निकल जाता है और सिर्फ वाद रह जाता है| प्यार की भावनाये नफरत, ईर्ष्या, गुस्से मे बदल जाती है | उसके आगे देखे तो रिश्ते और बिगड कर दंगे, दर्द और दुख बच जाता है| क्या रिश्ते कोई वस्तु है जो समय अनुसार पुरानी होकर टुट जाये, बिखर जाये| घर की हर वस्तु को maintainance की servicing की जरूरत होती है वैसे ही रिश्तो की भी समय प्रति समय करे| सिर्फ छोटीसी बात करे, सामनेवाले को एहसास दिलाये की मेरे लिए आप कितने महत्वपूर्ण हो|
आज हर घर मे ये दृश्य देखने के लिए मिलता है की सभी अपनी दुनिया मे व्यस्त है | मोबाइल से दूर बैठे व्यक्ति को अपना बनाने मे लगे है और नजदिक के है उनसे दूर होते है| साथ मे रहने वालों को एहसास दिलाते है की हम बहुत बिझी है, टाइम नही है, लेकिन अंजाने मे ये बताते है की आपसे भी ज्यादा हमारे लिए कुछ और महत्व का है | ये एहसास जितना गहरा उतना रिश्ते दुरिया बनाते लगती है | फिर उस शक्स से नाराजगी बढते बढते दीवार बन जाती है| भावणाओ को समजने के लिए वक्त नही दिया तो फिर टूटने के बाद उसे सवारने मे वक्त देना पडता है | फिर समय, शक्ति सब व्यर्थ जाता है| इसलिए कभी कभी कानसेन बने | कई बार सामनेवाला हमसे कुछ चाहता नही सिर्फ उसकी बाते कोई सुने यही अपेक्षा होती है कोई दर्द को सुन लेता है तो भी उसे राहत मिलती है| क्योकि आज सूनने वाला कोई नही|
अगर थोडी समझदारी बढाये तो टुटते हुए रिश्तो को बचा सकते है क्योकि हमे रिश्तो का मोल कई बार बिखरने, टूटने के बाद पता चलता है | इसलिए इसे समय पर ही बचाये |

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सिमर सिमर प्रभात मोरे मन

इस आधुनिक युग मे सुबह होते ही हर किसी के हाथ मे मोबाइल दीखाई देता है| बिस्तर से उठने के पहले whatsapp, facebook msg …. देखने मे लग जाते है| गुड मॉर्निंग, सुप्रभात, शुभ सकाळ .. के msg पढने और forward करने मे ही लगे रहते है| अच्छे quotes पढकर उसे जीवन मे लाना तो दूर ही रहा लेकिन अच्छा लगा तो लाइक किया, forward किया, बस| क्या किसी के गुड मॉर्निंग कहने से हमारी सुबह smajअच्छी होती है? मान लो रोज msg करनेवाले ने किसी दिन msg नही किया तो हमारी सुबह कैसी होती है? एक वक्त हुआ करता था, घर के बडे बुजुर्ग हमे सिखाते थे कि सुबह सुबह भगवान का नाम लिया करो| शास्त्रो मे भी है की बिस्तर छोडने के पहले भगवान का स्मरण करो, मुख पर उसका नाम हो| क्या आज ऐसा दृश्य दीखाई देता है?
आज का मनुष्य धन-संपदा, पद- पोजिशन से आगे बढ रहा है लेकिन उतनी ही मानसिकता कमजोर होती जा रही है| उसका एक कारण है यह आधुनिक साधन| ‘early to bed, early to rise..’ कहते है| जल्दी सोना, जल्दी उठना| लेकिन आज 95% लोग रात को देर तक जागते है और देरी से उठते है| जो समय पुरे दिन की थकान उतार अपने को चार्ज करने के लिए मिला है उसे दुनिया की व्यर्थ बातोसे भरकर और ही कमजोर अपने को कमजोर करने मे बीताते है| इसलिए बाहर की और से विकसित होने वाला मानव आज मन की बिमारीयो से, संबंधो की उलझन मे फसा हुआ नजर आ रहा है| समाज मे बलात्कार, हिंसा, झगडे, भ्रष्टाचार .. बढते हुए देख रहे है| घर मे क्या लेकिन हर एक के जीवन मे कई सारे दुख के कारण है| उसका सामना करना मुश्किल हो रहा है| दिन प्रतिदिन depression के मरीज बढते जा रहे है| साधन-सुविधाओ से शरीर को आराम मिल रहा है लेकिन मन का आराम कोसो दूर जा रहा है| साधन गलत नही है लेकिन साधानो का इस्तमाल करनेवाला ईन्सान उसे गलत तरीके से इस्तमाल कर रहा है| अगर सही तरीका और मर्यादित समय हो तो शायद उसका लाभ भी हो सकता है|
जीवन मे कुछ पाना है तो खुद को नियमो के बंधनो मे बांधना जरूरी है| जैसे रामायण मे दीखाते है जब सीता ने लक्ष्मणरेखा को पार किया तब रावण उठा के ले गया वैसे ही हम भी जीवन के हर पहलू को नियम पूर्वक चलाये तो सुख शांती बनी रहेगी| संबंध, सेहत, भोजन, निंद, व्यवहार, पढाई हर एक मे नियम बनाकर रखे| इसलिए सशक्त मन की आवश्यकता है| मन को शक्तिशाली बनाना है तो सुबह आंख खुलते ही प्रभू स्मरण करना है| जिस मन मे ईश्वर का वास है वह मन स्वच्छ, निर्मल और शक्तिशाली हो जाता है| सुबह को शक्तिशाली बनाना है तो रात को थोडीसी मेहनत करनी होगी| दिनभर किए हुए सभी कर्म का दर्शन खुद करे और वह ईश्वर के हवाले करके सोए जिससे मन हलका हो| क्योकि भारी मन से सोयेगे तो वही बाते सुबह याद आयेगी| ईश्वर बुद्धीदाता है, सही मार्गदर्शक है| जितना हम उनको अपनी समस्याए बताते है उतना वह हमे राह दिखाता है| रात को हम जो मानस पटल पर छोडकर सोते है वही सुबह पहली स्मृति मे आता है| इसलिए रात को सिर्फ 5 मिनिट भी अगर याद करते है तो सुबह मे याद करना आसान हो जाता है| और जिसने पहला दर्शन प्रभू का कर लिया उसका दिन कैसा बितेगा, हम समझ सकते है|
इसलिए भक्ति मे ईश्वर को शक्तिदाता, बुद्धीदाता, ज्ञानदाता कहते है जो हमे जीवन कैसे जिन है वह अपरोक्ष रूप मे सिखात है| वही लाइट-माइट हाऊस है, उससे मन का रिश्ता जुड जाये तो मन शक्तिशाली बन जाए| प्रभात का समय शक्तिशाली समय होता है| दिन की शुरुवात पवित्र, शुद्ध विचारो से करने से हम पुरे दिनभर मे आनेवाली बातो को सहज ही let go कर सकते है| नही तो छोटी छोटी बाते भी मन को दुःखी करती है| भारत की संस्कृति मे सुबह पूजा-पाठ, मंत्र जाप करने का महत्व है| कार्य की शुरुवात प्रभू स्मृति से करना सिखाया है|
तो चलो, इन सभी बातो का महत्व समझकर कुछ सावधानिया रखकर पहला स्मरण ‘प्रभू’ का करे| आप खुद अनुभव करेंगे की जीवन मे क्या बदलाव आते है| चलीये इसका प्रयोग आज से ही आरंभ करे|

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वंदे मातरम ( MOTHER’S DAY SPECIAL)

जीवन मे बहुत सारे रिश्ते मिले लेकिन सबसे नजदिक का कोई है तो वो है मा| कितने भी बडे हो जाये लेकिन उसकी गोदी मे समाने का सुख कुछ और ही है| लेकिन ऐसे निःस्वार्थ प्यार के कई रूप मा बनकर हमारी पालना करते है , आज ऊन सभी रुपों को दिल से वंदन|

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सरलता की मूर्ती हनुमान

 

रामायण मे अनेक विशेष अभिव्यक्ति मे से एक है हनुमानजी. हर मंगलवार और शनिवार को हिंदू जन संकटमोचन कहकर ऊनकी बहुत श्रद्धा से पूजा अर्चना करते है| हनुमान जी जिनका अनोखा रूप और अनोखी जन्म कहानी हम सूनते आये है| सिंदूरी रंग का रूप, वानर रूप मे दिखाया हुआ चेहरा और अनेक विशेषताओ से भरे हुए ऐसे हनुमान जी को हृदय से कोटी कोटी नमन| अंधविश्वास और धार्मिक आस्था के बीच एक पतली रेखा होती है| रामचरीत मानस मे तुलसीदासजी ने जनसामान्यो को समझाने के उद्देश्य से ही हनुमान की एक व्यक्ति रूप मे वर्णन किया है और उन्हे अपना गुरु का दर्जा दिया है|

हनुमानजी माता अंजनी और पिता केसरी के पुत्र थे| अंजनी अर्थात आंख और पिता केसरी अर्थात सिंह के समान अभूतपूर्व साहस और अभय की भावना| मनुष्य मे अच्छाई और बुराई आखों से प्रवेश होती है| ये दैहिक आंखे नही लेकिन मन की आंखे| हनुमानजी का जन्म विशुद्ध चिंतन व सिंह के समान अभय व्यक्तिद्वारा ही संभव है| हनुमानजी के नाम मे ही ऊनके गुणो की पहचान है| कहते है ना ‘जैसा नाम वैसा काम’| हनु का अर्थ है ग्रीवा, चेहरे के नीचेवाला भाग अर्थात ठोडी, मान का अर्थ है गरिमा, बढाई, सम्मान| इसप्रकार हनुमान का मतलब है ऐसा व्यक्ति जिसने  अपने मान सन्मान को अपनी ठोडी के नीचे रखा है, अर्थात जीत लिया है| जिसने अपने मान सन्मान को जीत लिया है, उसके प्रभाव से मुक्त हो गया है वही हनुमान हो सकते है| हनुमान का दूसरा नाम बालाजी भी है जिसका तात्पर्य है बालक| हमारे ग्रंथो मे हनुमान जी बालक की तरह दिखाए है| बालक की तरह निष्कलुष ह्रदयवाला व्यक्ति सन्मान पाने की लालसा इससे मुक्त रह सकता है| सही अर्थ्ओ मे ब्रह्मचर्य का पालन कर सकता है| श्रीराम जी के दरबार मे भी उन्हे हमेशा सबसे नीचे भूमी पर, सेवक के रूप मे हाथ जोडे बैठे हुए दिखाया जाता है|

लेकिन कई बार ये सवाल उठता है की ऐसे महान चरित्र को वानर की तरह क्यो चित्रित किया गया है? ऐसा प्रश्न आपके मन मे भी जरूर उठता होगा| कहा ऐसा महान व्यक्तित्व और कहा वानर रूप, जो एक निकृष्ट जानवर माना जाता है| वास्तव मे वानर प्रतीक है मनुष्य के अविवेकी मन का| हमारा मन भी वानर के समान सदा भटकता रहता है, अत्यंत चलायमान होता है| और मन का नियंत्रण बहुत कठीण कार्य है| हनुमान पवन पुत्र है अर्थात पवन से भी तेज चलनेवाले इस मन के वे पुत्र है| अब बताईये एक तो वानर की उपमा और दुसरी पवन की, दोनो भी अत्यंत चंचल| उनको वानराधीश कहने का तात्पर्य यही है की वे मन रूपी वानर का अधिपति है, स्वामी है| ऊनका अपनी चंचल इंद्रियो पर नियंत्रण है| केवल मन का स्वामी ही रामरूपी ईश्वर का सर्वोत्तम भक्त हो सकता है और धर्म के कार्यो मे निष्काम भाव से भाग ले सकता है|

यह तात्पर्य है उस रमण करनेवाले तत्व से जो हर जगह समानरुप से व्याप्त है| दशरथ नंदन राम तो उसे व्यक्त करने के प्रतीक मात्र है| निष्कामता हर गुणो की जननी है| हनुमान निष्काम गुण की प्रतिमूर्ती है इसलिए वे कहते है ‘राम काज किये बिन मोह कहा विश्राम’| वे पुरी तरह से राम के प्रति समर्पित है बिना  किसी आश के| इसलिए बहुत ही सुंदर चित्र दिखाते है की हनुमान जी के ह्रदय को चीर के देखे तो उसमे भी राम ही बसे है| असीम शक्तीओ से संपन्न होते हुए भी आज्ञाकारी और नम्र स्वभाव से पहचाने जानेवाले हनुमानजी की विशेषताओ का सिर्फ हम वर्णन ना करे लेकिन ऊनके जैसे बनने की चाहना भी रखे| क्योकि आज हम बडे चाव से रामायण सूनते देखते है लेकिन उनसे अच्छी बाते धारण नही कर पाते| हनुमान जयंती के दिन सिर्फ सूनने का मजा लेने के बजाय ऊनके जैसा बनने का भी लक्ष रखे| जो रिश्ते हमने बनाए है ऊनमे वफदार, प्रभू प्रीती मे समर्पित वृत्ती, समस्याओ का सामना करते वक्त साहस .. .. ऐसे कई गुण व्यावहारिक जीवन मे अपनाने का प्रण करे यही सच्चे अर्थ से हनुमान जयंती मनाना होगा|

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