रिश्ते बडे अनमोल

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जिसका अपने प्रति, समाज के प्रति कुछ उत्तरदायित्व है| सिर्फ खून के रिश्ते नही लेकिन हर एक के साथ हमे रिश्ते निभाने है| सुबह सुबह दरवाजे की घंटी बजाने वाले दूधवाला, पेपरवाला से लेकर ऑफिस, ट्रेन मे मिलनेवाले सभी के साथ अच्छे रिश्ते बनाने की जरूरत है| हम ये नही कह सकते की इनके साथ अच्छा व्यवहार करने की क्या आवश्यकता है? लेकिन नही, सब की हमे और सबको हमारी जरूरत है| साधारणसा कार्य करने वालों के साथ अच्छा व्यवहार, अच्छी बातचीत करते है तो वह भी समय पर मदद देने पहुच जाते है | आंखिर रिश्तो के बिना यह मनुष्य जीवन ही क्या ?
रिश्तो की गरिमा न जाननेवाले बडे आसानी से कह देते है की, ”मै अकेला जी सकता हू , मुझे किसी की जरूरत नही “ लेकिन सबसे जादा जरूरत उन्ही को लगती है | हमे हर रिश्ते की कदर करनी है | उसके लिए आवश्यक है हम हर एक को सन्मान दे | कोई ई न्सान छोटा या बडा नही होता, हमारी नजरिये से हम उसे बडा या छोटा बना देते है | जैसे हाथो की पाचो अंगुलिया अगर आपसमे लडने लगे की कौन सबसे बडा ? तो हर एक का महत्व अलग है ना | हम कहे ये सबसे छोटी, सबसे लास्ट वाली अंगुली न हो तो क्या फरक पडता है? लेकिन व्यावहारिक रित्या उसका होना ही इस हाथ की शोभा है| ऐसे ही समाज के हर वर्ग के तथा हर कार्य करनेवाले लोगो का महत्व है|
“रिश्तो मे भावना की सिलाई हो तो संबंध टिकते है लेकिन स्वार्थ हो तो टुटते है” | कितनी गहरी बात किसी ने कही है| ईन्सान को ईन्सान से जोडनेवाला ये स्नेहसेतू है| भावना ये स्वार्थ मे बदल जाये तो रिश्ते भी बदल जाते है| आज हर एक अपने आपसे ज्यादा प्यार करता है लेकिन औरों से प्यार है वह बताने का साधन है शब्द | इसका प्रयोग हम किस तरह से करते है, उसपर ध्यान रहे | आपनोट किजिये जब रिश्ते नये होते है तब सुसंवाद होता है | शब्द, भावनाये सब अच्छे होते है | जैसे जैसे आगे बढते है उसमे से सु गायब हो जाता है फिर संवाद बच जाता है | और थोडा समय बीतने पर सं भी निकल जाता है और सिर्फ वाद रह जाता है| प्यार की भावनाये नफरत, ईर्ष्या, गुस्से मे बदल जाती है | उसके आगे देखे तो रिश्ते और बिगड कर दंगे, दर्द और दुख बच जाता है| क्या रिश्ते कोई वस्तु है जो समय अनुसार पुरानी होकर टुट जाये, बिखर जाये| घर की हर वस्तु को maintainance की servicing की जरूरत होती है वैसे ही रिश्तो की भी समय प्रति समय करे| सिर्फ छोटीसी बात करे, सामनेवाले को एहसास दिलाये की मेरे लिए आप कितने महत्वपूर्ण हो|
आज हर घर मे ये दृश्य देखने के लिए मिलता है की सभी अपनी दुनिया मे व्यस्त है | मोबाइल से दूर बैठे व्यक्ति को अपना बनाने मे लगे है और नजदिक के है उनसे दूर होते है| साथ मे रहने वालों को एहसास दिलाते है की हम बहुत बिझी है, टाइम नही है, लेकिन अंजाने मे ये बताते है की आपसे भी ज्यादा हमारे लिए कुछ और महत्व का है | ये एहसास जितना गहरा उतना रिश्ते दुरिया बनाते लगती है | फिर उस शक्स से नाराजगी बढते बढते दीवार बन जाती है| भावणाओ को समजने के लिए वक्त नही दिया तो फिर टूटने के बाद उसे सवारने मे वक्त देना पडता है | फिर समय, शक्ति सब व्यर्थ जाता है| इसलिए कभी कभी कानसेन बने | कई बार सामनेवाला हमसे कुछ चाहता नही सिर्फ उसकी बाते कोई सुने यही अपेक्षा होती है कोई दर्द को सुन लेता है तो भी उसे राहत मिलती है| क्योकि आज सूनने वाला कोई नही|
अगर थोडी समझदारी बढाये तो टुटते हुए रिश्तो को बचा सकते है क्योकि हमे रिश्तो का मोल कई बार बिखरने, टूटने के बाद पता चलता है | इसलिए इसे समय पर ही बचाये |

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