युवा बचाओ

वर्तमान समय एक ओर मनुष्य विकास की ओर आगे बढ़ते हुए नजर आ रहा है तो दुसरी ओर  जीवन में सामाजिक, आर्थिक, शारिरीक, मानसिक स्तर गिरते हुए दिखाई दे रहा है |   विज्ञान ने तो आज के युवा को विकास की इतनी दिशाए दिखाई है कि वह भ्रमित हो रहे है कि कहाँ जाए और क्या करे ?  एक वक्त था कि परिवार के सदस्य, पालक अपने बच्चों को सही पथ दिखाते थे परंतु आज वह भी समझ नही पा रहे है कि हमारे बच्चों को कौनसा मार्ग दिखाना चाहिए इसलिए विज्ञान ने उनको सल्लागार (councellor) भी दिए |   लेकिन फिर भी —–

आज हम अपने युवाओं को मानसिक रित्या बहुत कमजोर, व्यसनाधीन, दिशाहीन देख रहे है |   जीवन तो जी रहे है,  शिक्षा की नयी-नयी बातों को जल्दी से आत्मसात भी कर रहे है,  अच्छी Degree भी ले रहे है लेकिन संबंधो में आने वाले उतार-चढाव का सामना करना,  परिस्थितीयों  को समझकर सहन करना, निर्णय लेना—- इन बातों में कमियाँ दिखाई देती है |   आजकल हर चीज हमें instant मिलती है |  पदार्थ, पैसे, टिकट, सुविधाएं, मनोरंजन —— इसलिए कुछ समय रूककर समस्याओं के सही रूप को देखने का धीरज वह खो बैठे है | 

कुछ समय पहले भाईंदर की खाड़ी में एक युवक ने फाँसी लगाकर जीवघात (suicide) किए हुए कुछ फोटो देखे थे |   अंदर बार-बार सोच चल रही थी कि ऐसा क्या हुआ होगा, जो इतनी कम उम्र में जीवन को खत्म करने का ही एक पर्याय इसके पास था ?  कोई भी परिस्थिती का रूप हो, कोई अपने आप को ख़त्म करने का बल दिखा सकता है लेकिन उस परिस्थिती  का सामना नहीं कर सकता ?  वास्तव में यह कमजोर मन की निशानी है जो समस्या का समाधान सिर्फ अपने को ख़त्म करना समझते है | 

बचपन से बच्चे को ये सिखाया जाता है कि तुम्हारा दोष नहीं है, सामने वाला गलत है |  जैसे कोई बच्चा चलना सीख रहा है,  कभी-कभी वह चलते वक्त गिर जाता है, वह रोने लगता है तो माँ उसे चूप कराने के लिए आसपास अगर कोई व्यक्ति, टेबल, या कोई चीज हो उसे मारकर बताती है कि इसके कारण गिरे होना, इसे मैं मारती हु, तुम्हारा कोई दोष नही |   वह बच्चा भी यह सब देख रोना बंद कर देता है |   वही बच्चा बड़ा होने के बाद जिद्द करके अपनी हर ख्वाईश अपने माँ-बाप से पूरी करवाता है |  अगर न हो तो रोना, रूठना, मारना यह सारी बातें करता है | और उनके मात-पिता  भी ऐसे बच्चों को सम्भालने में शक्तिहीन हो जाते |  कुछ गलतियाँ बड़ों की भी है जो अपने बच्चों को लाड़प्यार में कमजोर बना रहे है | 

आज बच्चों का I.Q. test कराया जाता है | वह फिर भी अच्छा दिखाई देता है परंतु  भावनिक और आध्यात्मिक विकास पर भी उतना ही ध्यान देने की जरूरत है |  घर में भी आज हर किसी की दुनिया अलग बनी है | जो सामने है उनसे बात करने के लिए समय नही और जिन्हे है  पहचानते ही नही उनके साथ घंटो-घंटो बात करने में लगे हुए है |   पहले बच्चों को मैदानी खेल सिखाए जाते थे, अब मोबाइल पर ही सब खेल खेल लेते है |  एक-दूसरे के विचार सुनना, समझना, उनके साथ अपने को adjust करना —- यह नहीं कर पाते |  ऐसे बच्चों के सामने अगर कोई छोटी समस्या भी आ जाए तो उन्हें वह बड़ी लगती है क्यों कि वह अंदर से बिल्कुल कमजोर है |  डर, चिंता, परेशान होना, गुस्सा करना, चुप-चुप रहना —— यह आज सभी युवाओं में नजर आ रहा है |   आश्चर्य की बात तो यह है कि अपनी भावनाए वह अपने परिवार के सदस्यों को बताने के बजाए वह अपरिचित लोगों के साथ (councellor) करते है | क्या अपने ही उनको समझ नहीं पाते ? 

हम बड़े आसानी से कहते है, ‘ आज कल के बच्चे तो —-’ लेकिन उनको ऐसे  बनाने वाले कौन ?  छोटे बच्चे तो मिट्टी के घड़े के समान होते है |  उनको जैसा ढालो वैसे वह ढल जाएंगे |  आज महंगाई, स्पर्धा, वैयक्तिक जीवन —– इन सभी में शायद हम उनके मानसिक विकास के लिए समय नहीं दे पा रहे है लेकिन हम उनकी भावनाओं को समझने के लिए थोड़ा वक्त जरूर दे |   वह ऐसे क्यू कर रहे है उसे जानने की कोशिश करे |  शायद वह अपनी समझ, आयु —- के अनुसार सही भी हो |  एक बात को तो हम सभी को समझना ही होगा कि कोई भी इन्सान गलत नहीं लेकिन अलग है |  हर एक की choice अलग है, इस अनेकता, विविधता को हम स्वीकार करें |

अगर रिश्तो में हमें कुछ बदलाव लाना है तो पहले उन्हें वह जो है, जैसे है, स्वीकार करें | इस स्वीकार करने से उनको भी हम से सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी |   अगर हम उन्हें बार-बार दोष दिखाते  है माना ही हम उन्हें पसंद नहीं करते है यह बता रहे है |   और यह अगर बार-बार होता रहा तो रिश्तो में दरारे आना शुरू हो जाती है | हम इतनी दूरियाँ न बनाए जो कभी हम उन्हें आवाज दे तो वह उन्हें सुनाई भी न दे |   बहुत छोटी सी जिंदगी है, अपनों के साथ बहुत प्यारे रिश्ते बनाए |  ऐसा रिश्ता जो दूर होते हुए भी सदा पास होने का अनुभव कराए |   आज रिश्ते बहुत नाजुक हुए है इन्हे बनाने की कोशिश करें |   क्यों कि  आज के हमारे बच्चे, हमारा और देश का भविष्य है |  इन्हे बुरे संग से, बुरी आदतों से और साथ-साथ बुरे कर्म, बुरी सोच से बचाए | 

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