मन को अपना मित्र बनाये

आज मनुष्य ने अपने बुद्धिबल से बहुत कुछ हासिल किया है| कुछ सालो पहले जो बाते असंभव लगती थी, वह आज सबकुछ नजरो के सामने प्रत्यक्ष हो रहा है| बचपन में दूर बैठे इन्सान को अपनी मन की भावनाए पहुचाने के लिए पत्र, तार भेजते थे| उनसा जवाब कब आएगा उसका इंतजार करना पड़ता था| विदेश में रहनेवालों के लिए तो और ही राहे तकनी पड़ती थी| लेकिन आज विज्ञान ने कहा पर भी बैठे हुए रिश्ते तक अपनी भावनाए १ सेकेंड में पहुचाने वाले साधन बनाकर दिए है| लोगोंसे बात करना, किसी को ढूंढना, रिश्ते बनाना बहुत आसन हुआ है| बाहर की और मनुष्य प्रगत हो रहा है लेकिन अन्दर की और उतना ही खाली| अपनोंसे, अन्जानोसे बात करना जितना आसान उतना खुद से बात करना मुश्किल लग रहा है| अपने से दुरी बढती जा रही है| इसी दुरी के कारण मनुष्य सुख-शांति से भी दूर होता जा रहा है|

        किसी को भी हम पूछते है की जीवन में क्या चाहिए? तो जरुर यही जवाब मिलता है की ‘सुख-शान्ति चाहिए’, वो कहा और कैसे मिलेगी इसकी खोज में इन्सान भटक रहा है| कभी मंदिर,जंगल, बगीचा, पहाड़, सागर का किनारा, गुफा… कितनी जगहपर ढूंढ लिया लेकिन अपने उंदर जाकर ढूंढने की समझ किसीने नहीं दी|हर चीज बाहर खोजी, किसी से मांगी मगर यह ऐसी चीजे है की किसी स्थान पर न मिल सकती है न कोई दे सकता है| हमें जो चाहिए वह सबकुछ अपने अन्दर ही मिल जायेगा| वह पाने के लिए मन की अपना मित्र बनाने की आवश्यकता है|

       वर्तमान समय छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग इन्सान तक हर किसी को friends बनाना अच्छा लगता है| facebook, whatsapp, twitter…. इनसे हम अनजान व्यक्तिओंसे रिश्ते बना रहे है लेकिन खेद की बात तो यह है की हम अपने मन को मित्र नहीं बनाने में असफल हो रहे है| मन को तो पूरा दिन इधर से उधर भटकते रहते है| जिसके साथ बैठकर बात करने से हर कार्य संभव हो सकते है, छिपी हुए शक्तियों के खजाने मिल सकते है, प्रगति के सरे द्वार खुल सकते है…. उसको मित्र बनाने के बजाय हम इन्सान को मित्र बनाकर अपना समय, शक्ति… कितना कुछ व्यर्थ गवाते है| मन लो किसी व्यक्ति से मित्रता करते है लेकिन उससे कोंसी बातचीत करते है? इसलिए अगर हमें सुख-शान्ति का अनुभव करना है तो सर्वप्रथम अपने लिए समय निकाले|

        हमारा मन बहुत आज्ञाकारी है| वह हमें कई बाते accurate बताता है| आपने अनुभव किया होगा की रात को जिस सोच को लेकर आप सोये हो, आँख खोलते है तो पहले वही सोच आ जाती है| जैसे mobile में कोई app खोलकर उसे पूरा बन्द न किया हो तो जब उसे खोलते है तो पहले वाली चीज आपको दिखाई जाती है वैसे ही मन हमें रोज बताता है की आप किन विचारो को लेकर सोये थे| अगर वह विचार व्यर्थ, नकारात्मक, तनाव या दुःख से भरे हे तो आँख खोलने के बाद उन्ही विचारोंसे शुरुवात होती है| इसलिए मन को व्यर्थ दिशाओं में दौड़ाने के बजे उसे सही रह पर लेकर आये| मन में व्यर्थ विचार उठते हो तो सकारात्मक, श्रेष्ठ विचार देने की प्रैक्टिस करे| बार-बार उसे व्यर्थ से समर्थ की और लेकर आए क्योकि व्यर्थ सोचने की आदत भी तो उसे हमने ही डाली है|

       जैसे किसीको रोज चटपटा खाने की आदत पद जाये तो बिना मिर्च मसालेवाले पदार्थ अच्छे  नहीं लगते वैसे ही शुरुवात में अच्छे विचार करना boiring लग सकता है मगर उसी से हमारे मन की सेहत अच्छी बनेगी| मन लो आपके मित्र को शराब पीने की लत लग गयी हो तो  बार बार उसके कदम किस और जायेंगे? वैसे ही इस मित्र को तनाव, दुःख, उदासी…. बारे विचारों की आदत पडी है, उसे प्यार से, धीरज से सही रस्ते पर लाना है| दिन में कुछ ऐसे कार्य होते है जहा हमें बहुत ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं होती| जैसे स्नान करना, चाय पीना, पैदल करना…. उस समय पर जागरूकता से मन में श्रेष्ठ विचार लाये| मै बहुत खुश हु, जो भी मुझे मिला है उसके लिए मै भगवन का शुक्रगुजार हु, सबकुछ अच्छा है, हर बात में कल्याण है….ऐसी सोच रखने से हमें खुद को अच्छा लगेगा| विचार शांत होने लगेंगे| धीरे-धीरे उलझाने समाप्त होने लगेगी| इसलिए इस मन मित्र के साथ बात करने में समय बिताये| अगर वह आपको साथ देना शुरू करे तो दुनिया की कोई व्यक्ति, हालाते, समस्याए आपको हिला नहीं सकती| यह दोस्त ऐसा है की आपको हर पल, हर परिस्थिति में साथ देगा| सिर्फ ये ध्यान दे| उसके साथ प्यार भरी बाते करे| अपने लिए, इस दोस्त के लिए समय निकाले | इसलिए कहते है ‘ मन जीते जगतजीत ’| इसको अपना बनाया तो सारा जग अपना लगने लगेगा| इसपर जीत पायी तो सारे जहाँ को जीतने की समर्थि आपमें आएगी

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8 Comments

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