बदला नही लेना किसी से, बदल के हमको दिखाना है

‘बचपन के दिन भूला न देना, आज हसे कल रूला न देना..’ भले हम कितने भी बडे हो जाये लेकिन बचपन के दिन भुला नही पाते, हसने और रोने के दिन| छोटेपन मे जब खेलने जाते थे और कभी किसी से हातापायी होती थी, रोते हुए घर आते थे तो कहते थे की कभी किसी का मार खाके नही आना | मार खाना माना कमजोर| कभी कमजोर नही रहना| ऐसी शिक्षाए अकसर मिलती थी| सामनेवाले को सबक सिखाना माना बहादुरी ऐसा हम सभी का मानना है| ‘tit for tat’, तभी समझ नही थी| वो बाते सही लगती थी| लेकिन आज जब कर्मो के गहरे राज समझ रहे है तब वो बाते गलत लग रही है| हम समाज मे भी ज्यादातर ऐसे लोग देखते है जो इट का जवाब पत्थर से देना जानते है| लेकिन ऐसे भी लोग दुनिया मे है जिन्होने पत्थर का जवाब फूल से दिया है|

     एक सत्य घटना हमारे सामने है| एक मुस्लिम महिला जिसका नाम रुकिरा है| उसका बेटा सुलेमान जब चौदा साल का था तब किसी बच्चे ने चंद रुपयो और अन्न के लिए उसका खून कर दिया| खूनी बच्चे की उम्र सिर्फ ८ साल की थी| रुकिरा को अपने बच्चे के खून का बहुत दुःख हुआ| लेकिन उसने उस बच्चे को माफ कीया| उसको १४ साल की कैद भी हुई लेकिन उस दौरान वह उस बच्चे से मिलने भी जाती थी| जब वह बच्चा जेल से बाहर निकला तब उसने उसे अपना बच्चा बना लिया| आज वह दोनो आमने सामने रहते है| कहने का भाव यह की गलत कर्मो की सजा हम किसी को क्या दे? लेकिन ईश्वर ने हमेशा क्षमा करना सीखाया है| क्या हम किसीकी गलती को जल्दी माफ कर पाते है? बडी बाते तो छोडो लेकिन छोटी छोटी बातो का भी बदला लेने की चाहना रखते है| मन मे उसी तरह के ख्यालात रखते है| अपने को भी वही समझाते है की ‘यह बात तो सही है की कोई मेरा नुकसान करे तो मुझे भी उसके साथ वैसा ही करना चाहिये| हम साधारण मनुष्य है, महान नही’| ऐसे सोचकर हम गलत कर्म करने की छुट्टि दे देते है| लेकिन सही कर्म करने की शक्ति नही रखते|

     कभी सोचकर देखे की कोई हमारे साथ ऐसा व्यवहार कयू करता है? शायद कभी हमने भी उससे वैसा वर्तन कीया होगा| आज वह लौटा रहा है तो हमे वह मंजूर नही| हम सिर्फ वर्तमान को देख वैसा कर्म कर लेते है| मगर सच तो यह है की कर्म का हिसाब तो कई जन्मो का है| जब तक वह चूक्त नही करते तब तक वह हमारे सामने रूप बदल कर आते रहेंगे| इसलिए समझदारी इसीमे है की उसे जल्दि चूक्त कर रवाना करे| यह गुह्य राज है की ‘ कोई तब तक आपको दुःखी या नुकसान करेगा, जितना आपने उसका कीया है’ लेकिन इस बात की जानकारी न होने के कारण हम आज ‘tit for tat’ के अनुसार चल रहे है| खुद भी दुःखी और औरों को भी दुःखी करते रहते है|

     जब ऐसे कोई कर्म बंधन सामने आये तो कुछ समय अर्थात जब तक परिस्थिती थंडी न हो तब तक मौन रखना, दूरी बनाए रखना यह समझदारी है न की उनसे उलझना| हम जितना हो सके react न करे| क्योकि react करने से वह दुःख की लेन-देन और बढती रहेगी| ये कर्मबंधन अर्थात ही किसी आत्मा से लिया हुआ कर्ज जो उसे लौटाना पडता है| ये कर्ज सुख और दुःख दोनो का होता है| ‘ जो हम देंगे वही हम पायेंगे’ यह कर्म का नियम है| सुख देंगे तो सुख मिलेगा, दुःख देंगे तो दुःख मिलेगा| हमने औरों को क्या दिया वह हमे याद भी नही रहता परंतु जब बाते सामने आती है तो इस नियम को भूल जाते है|

      इसलिए हमे धैर्यता और समझदारी से इस राह पर चलना है क्योकि आखिर हर एक को अपने साथ अपने कर्मो को ही लेकर जाना है| बदला लेंगे तो सामनेवाला भी वही हमारे साथ कारेगा| लेकिन अगर हम बदलकर दिखायेंगे तो अन्य को भी बदलने की प्रेरणा मिलेगी और हम भी कर्म बंधनो से मुक्त हो जाएंगे|

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