फुलस्टॉप

बचपन में मात-पिता से लेकर टीचर तक हर कोई बोलना, लिखना, चीजों के नाम पहचानना …….. सब सिखाते है और कितना हमें सही आता है उसकी test लेते है | जब हाथ में पेन्सिल पकड़ना भी ठीक से नहीं आता था, तब हम पहले उस पेन्सिल की नोक से बिन्दी लगाना अर्थात विराम (fullstop) की मात्रा लगाते थे | जैसे बड़े होते गए, समझदार अपने आप को कहलाने लगे | उतने ही जीवन के हर दृष्योंको देख सवाल पूछना सीख गए | मन चाहा जबाब नहीं मिलता तब तक सवाल पूछते रहे | कभी अपने से तो कभी औरों से | स्कूल लाइफ में जो मात्रा लिखने में सब से टेढ़ी बाकी लगती थी , मुश्किल लगती थी वो आज सहज लगती है | लेकिन जब कुछ लिखना भी नहीं आता था तब जो मात्रा सहज लगती थी वही मात्रा आज बहुत ही कठिन महसूस होती है |

आज के इस आधुनिक युग में विज्ञान ने मनुष्य को बहुत सारे साधन निर्माण करके दिए है | और नई खोजे करने में वह लगा हुआ है | कोई भी खोज करते समय उस बात को लेकर कई अलग सवाल निर्माण कर उसकी खोज करते रहते है | सवालों में उलझने की जैसे आदत सी पड़ी है | विचारों की गति दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है | जैसे रोजमर्रा के जीवन में मनुष्य हर कार्य में अपनी गति को बढ़ाना पसंद करता है | गाड़ी fast चलाने में मजा आता है अगर मान लो कोई धीमी गति से चलता है तो उसे ‘थोड़ा तेज चला’ ऐसा कह देते है वैसे ही हमारी सोच भी fast हो रही है | इसको ब्रेक लगाना आज इन्सान को मुश्किल लग रहा है | अपनी ही सोच से परेशान होते जा रहे है | आपने देखा होगा जब इन्सान गुस्से में, बदले की भावना, तनाव, ईर्ष्या ……… के वश होता है तब उसके विचारों की गति बढ़ती है, वही अगर अच्छा सोचना शुरू करो तो गति धीमी हो जाती है | हमें अपनी नकारात्मक सोच को अगर stop करना है, तो हमें अच्छा सोचने की आदत डालनी होगी |

जीवन को नई दिशा देनी हो तो पुरानी बातों को फुलस्टॉप लगाते है | स्कूल लाइफ में जब निबंध (essay) लिखने के लिए कहते थे, तब उसके रुख को बदलने के लिए विराम का चिन्ह लगाते थे | आज वही विराम जिंदगी में लगाने की मेहनत करनी पड़ रही है | पुरानी बातें, पुरानी घटनाएं , पुराने अनुभव उनसे अच्छा लेकर जो ‘ बिता उसे बिंदी लगानी है ’| बिता हुआ कल जिसे भूतकाल कहते है, जब भी उसे याद करो तो वह भूत के समान वह डरावना लगता है, दर्दनाक लगता है | ऐसी बातों को याद कर हम अपने आज को न बिगाड़े | पुरानी बातों को fullstop लगाने के लिए मन शक्तिशाली होना जरुरी है | कमजोर मन व्यर्थ के विस्तार में जाएगा | लेकिन शक्तिशाली मन बातों को मोड़ने की ताकत रखेगा | जिंदगी के हर पड़ाव को पार करना है तो रास्ते में आई हुई हर बातों को पार करना सीखे | आज के, अभी के पल को जीकर देखे तो कल आपे ही सवर जाएगा |

छोटी सी जिंदगी में बहुत कुछ करना बाकी है | इसे व्यर्थ की बातों में न बिताए | इसे ख़ूबसूरत बनाने के लिए सूंदर विचारों को अपने मन में बटोर ले | ऐसे लम्हे अपनी स्मृति में रखे जिन्हे कभी भी याद करे तब सुख की सुगंध महक जाए | बुरी बातों को fullstop लगाकर नयी सोच रख जीवन को नयी दिशा दे |

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