दिपावली मनाए नई सोच के साथ

भारत ही एक ऐसा देश है जहा त्योहारो की शृंखला चलती है| गणेशोत्सव, नवरात्रि उत्सव और फिर दिपावली लेकिन दिपावली का महत्व कुछ और है| जिसका इंतजार बच्चे-बुढे सबको रहता है| कई दिनो पहले से सब उसकी तयारी मे लग जाते है| सफाई, नये वस्त्र, नई चीजे, मिठाईया .. हर घर मे दिये जलाकर रोशनी की जाती है| पुरा माहोल उमंग, उत्साह से भर जाता है| वर्तमान समय हम जिस दौर से गुजर रहे है उसमे कुछ सावधानिया बरतनी पड रही है लेकिन फिर भी हम दिपावली का त्योहार मास्क पहनकर, दुरिया बनाकर भी मना रहे है|

जैसे आज मास्क, सोशल distancing, sanitase करना जरूरी है वैसे आज दिपावली हम नये अंदाज के साथ मनाये| त्योहारो मे नये कपडे पहनते है उसी तरह नये तरीको को अपनाकर चले| korona के कारण मुह पर मास्क लगाना अनिवार्य है| कईयो ने उस मास्क को भी fashion का रूप दे दिया है| जैसा ड्रेस वैसा मास्क| क्या हम जैसा समय वैसी सोच बनाकर चल सकते है? क्या कम बोलकर समस्या को कम कर सकते है? मुह पर पट्टी बांध लेना माना व्यर्थ, नकारात्मक बोल को पट्टी लगाना| कहते है ‘चूप रहने मे सों गुण’| इसलिए समय भी हमे चूप रहना सिखा रहा है| आज हम सभी को ‘ Happy New Year ’ का massege भेज रहे है, शुभ कामनाए दे रहे है लेकिन साथ साथ नई सोच भी रखे| दिपावली माना पुराना खाता खत्म और नया शुरू | हम व्यवहार मे भी इस बात को लाये| पुरानी यादे, बाते, गलत अनुभव ऊनको delete करते जाये| आज तक जो react करने का तरीका रहा उनको आज से बदल दे| तभी कह सकते है नया साल| पुरानी बातो को लेकर नया साल कैसे मना सकते है?

दुसरी बात social distancing रखते है जिससे सामनेवाली की सेहत का हमपर असर ना हो, वातावरण मे फैले हुए gems हावी ना हो| आज कोई रुठ जाता है, नाराज होता है, गुस्सा करता है तो उसका असर जरूर हमपर होता है और हम भी वैसे ही करने लग जाते है| या कोई हसकार बात करे हो हम वैसे कर लेते है| अर्थात परिस्थिती का प्रभाव पडता है| उस प्रभाव से बचने के लिए हम ‘थोडीसी दूरी है जरूरी’ इसको समझे| विचारो की भिन्नता होते हुए भी सबको अपना कर चलना| आज बार बार हाथ धोने के लिए इशारा दिया जा रहा है, हम अपने मन पर लगने वाले कुविचारो के मैल को भी बार बार धोते रहे जिससे हमारी मानसिकता अच्छी रहे| शरीर की immune को बढाने से सदा सेफ रह सकते है वैसे ही हम अपनी मन की immune को बढाने के लिए रोज शुद्ध विचाऱ्ओंका सेवन करे| आज हम नये साल की शुरुवात नई सोच के साथ करे| रोज सुबह एक समर्थ, सकारात्मक सोच को मन मे लाये और पुरा दिन उस विचार को दोहराये| आप अनुभव करेंगे की सोच से हमारी कार्य प्रणाली भी फास्ट हो जाती है | इससे हमारा तन और मन दोनो सुरक्षित रह सकते है|

तो आईए, समय के परिवर्तन के साथ अपनी सोच को बदलकर जीवन को नये अंदाज के साथ जीकर देखे| नई सोच, नया तरीका ही जीवन मे उमंग भर देता है| और “जहा उत्साह है वहा उत्सव है”| नाही तो उत्सव होते हुए भी दुखी हो जाएंगे| चलो इस बार हम दिपावली का त्योहार कुछ स्थूल सावधानीयो  को ध्यान पे रखते हुएमन को शक्तिशाली बनाकर मनाए|

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