जागते रहो

बचपन में गांव में या शहरों में रात के समय पर पहरेदार आवाज लगाते थे ‘जागते रहो’ |  कई बार मन में सवाल उठता था कि  रात का समय है, सोने का समय है फिर ये क्यू कहते है कि जागते रहो ?  लेकिन न वह बात समझ में आती थी, ना कभी किसी से पूछा |  लेकिन आज उसका अर्थ समझ रहे है कि दिन हो या रात हम सभी को इस समय पर जागृत रहना कितना जरुरी है | भक्तिमार्ग में गणपति या नवरात्रि के दिनों में जागरण करते है |  रात जाग कर निकालते है |   कई उसमें  भगवान के भजन किर्तन गाते है, प्रवचन सुनते है, तो कई ताश खेलते हुए भी नजर आते है |  इस ‘जागरण’ या ‘जागते रहो’ का अर्थ क्या है ?

एक वक्त था जब इन्सान को गलत कर्म जैसे चोरी, खून, बलात्कार। ……..  करना होता था तो रात को करते थे |   समझते थे किसी को पता नहीं चलेगा कि इस अंधेरे में ये काम किस ने किया है |  लेकिन आज सारे गलत कर्म दिन दहाड़े भी होते है | कहते है ये कलयुग रात है अर्थात ही ये पूरा ही रात्रि का समय है जिस में कुकर्म की प्रेरणा मनुष्य के मन में दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है |  एक है अज्ञानता का अंध:कार , जिसमें मनुष्य सही राह कि तलाश में है | जीवन में बढ़ती समस्याओं के बीच सही निर्णय लेने की क्षमता वह खो बैठा है |  ज्ञान की रोशनी का एक किरण भी मिल जाए, उसकी खोज में भटक रहा है |   शास्त्रों के पन्नों को पलटकर देखा, गुरुओं के प्रवचन को सुनकर देखा, कई कर्मकांड भी किए परंतु वो खोज सफल नहीं हुई |   ऐसा सुख-शांति, प्यार के लिए भटकता हुआ मानव देख रहे है तो दूसरी ओर  मोह, लालच, नफ़रत की आग में जलता हुआ मानव विकारों के कारण खुद की तथा दूसरों की तबाही करता हुआ नजर आ रहा है |

बचपन में भूतों की कहानी सुनते थे तब एक चीज कॉमन होती थी जिस में रात में भूतों का प्रभाव बताया जाता था |   आज हम मनुष्य की वृत्ती में बसे हुए काम, क्रोध जैसे विकारों के किस्से सुनते है |   हिंसक वृत्तीयों को बढ़ता देखते है |   ऐसे समय पर सतर्क रहना आवश्यक है |  किसी की गलत वृत्ती का शिकार हम तो नहीं हो रहे ?  या मेरी ही कोई गलत मनोधारणा से किसी का नुकसान तो नहीं हो रहा ?  इसलिए ‘जागते रहो’ का मंत्र याद रखना है |  जैसे अंधेरे में एक-एक कदम संभल-संभलकर रखते है वैसे मुझे इस दुनिया में हर कर्म संभलकर करना है |  जागृत होकर चलना है |  हम घर में तो रोशनी करते है परंतु घर के बाहर भी प्रकाश हो इसका ध्यान देते है वैसे ही मेरे अंदर कोई भूत जन्म तो नहीं ले रहा ?  गुस्सा, ईर्ष्या, स्पर्धात्मक वृत्ती, कामुकवृत्ती बढ़ तो नहीं रही इस पर तो ध्यान देना ही है |   ज्ञान का दीपक पहले मेरे मन में जलाना है फिर बाह्य विश्व में भी यह बढ़ रही है लेकिन इसमें में कैसे सुरक्षित रहूँ इस पर भी ध्यान हो जिस को ही सच्चा जागरण कह सकते है |

वर्तमान समय रात को भी दिन बनाने की विज्ञान की शक्ति हम देख रहे है परंतु  सच्चा सुख किस में है, सफलता या सच्ची प्राप्ति किसे कहेंगे, कौनसी दौड़ को जीतना चाहिए ऐसे कई सारे सवालों के जवाब देनेवाले ज्ञान की रोशनी मनुष्य के पास नहीं है इसलिए आज भी भौतिकता में फॅसा हुआ मानव ठोकरे खा रहा है |  गलत पथ पर जा रहा है |  इस मायावी नगरी में भूले करता जा रहा है इसलिए जागृत रहना है |  न हम से भूले हो, न किसी को भूले करने देना है |  ज्ञान की सही राह पर चलना है |  ऐसे भी शायद हो सकता है कि इस समय पथपर चलने में हजारों मुश्किलें आए मगर सही दिशा में आगे बढ़ना है |

कहते भी है ‘सत्य का मार्ग बड़ा कठीन है’ इसलिए झूठ बोलना सहज लगता है |  जीवन में ऐसे कई शॉर्टकट लेते है लेकिन यही हमारे लिए मुश्किलों का जाल बनाते है |  छोटे-छोटे कर्मों में उलझकर आसान जिंदगी को कठीन बनाते है |   थोडासा जागरण हमें बेहतरीन पल दे सकता है इसलिए ‘जागते रहो’ |

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