क्षमा वीरस्य भूषणम

जीवन एक सफ़र हैं| इस सफ़र की कई अच्छी-बुरी यादे हमने इस मन में संजोए रखीं हैं| जब कभी अकेले हो जाते है तो वह यादे ताजा हो जाती हैं| आधुनिक जगत की सबसे प्यारी चीज जो आज सब अपनी जेब में लेकर चलतें हैं, वो है mobile. कई photos, videos हम उसमें store करते हैं| उनके द्वारा कई बीते हुए लम्हे याद करतें रहते है| सुखद बातों को याद करो तो मन खुश हो जाता है परंतु वही अगर दु:ख की घटनाए याद आ जाए तो कभी-कभी बदले की भावनाए भी जाग उठती है|
जीवन में सुख-दु:ख को धूप-छाव की तरह बदलते हमने देखा हैं| परंतु यदि किसी के लिए नफरत या बदले की भावना हो तो हम उसे रुककर मिटा दे क्योंकि वो भावना किसी और को नहीं लेकिन खुद को ही कांटे की तरह चुभती हैं| भल किसी ने दर्द दिया हो, नुकसान किया हो या फिर फ़साया हो…… जीवन एक छोटासा सीन समझकर उसे भूलाने की कोशिश करे| कहा जाता है ‘माफ़ी माँगना बड़ी बात नहीं परंतु माफ़ करना सबसे बड़ी कला है’ इसलिए कहते ‘क्षमा वीरस्य भूषणम’| गाली देनेवाले को गले लगाना – यह महानता के लक्षण हैं, जो हर किसी में नहीं पाए जाते| इस गुण के कारण ही कई लोग महात्मा बने| भले के साथ भला और बुरे के साथ बुरा यह तो हर कोई करता है लेकिन बुरे का भी भला हो यह भावना बहुत कम लोगों में पायी जाती हैं| मोहम्मद साहेब उनके जीवन का किस्सा याद आता है| मोहम्मद साहेब नमाज़ के लिए रोज मस्जिद में जाते थे| जिस रास्ते से गुजरते थे उसी रास्ते में एक वृद्धा का घर लगता था| जैसे ही वो वृद्धा उन्हें आते देखती थी वो अपने घर का कचरा उनपर फेकती थी| मोहम्मदजी कुछ न बोल उस कचरे को झटककर आगे बढ़ते थे| एक-दो दिन नहीं परंतु ये रोजाना होता था| फिर भी मोहम्मद साहेब उस वृद्ध महिला के प्रति सद्भावना रख उसे माफ़ करते थे| एक दिन वो हमेशा की तरह उसके घर के सामने से गुजरे तो क्या आश्चर्य? न वो महिला दिखाई दी, न कचरा डाला गया| उन्हें थोड़ा सा अचरच तो हुआ मगर वो ज्यादा न सोच आगे बढे| दो-तीन दिन लगातार उन्हें वो वृद्ध महिला नजर न आयी फिर उन्होंने सोचा चलो जाकर देखें तो सही वो कहाँ है? दरवाजे को खटखटाया, वो महिला बड़े कष्ट से दरवाजा खोल पायी| उन्होंने देखा तो बिचारी बुखार में तड़प रही थी| तुरन्त वैद्य को लेकर आए और उसका इलाज़ करवाया| कुछ ही दिनों में उनकी सेवा-शुश्रूषा से वह बिल्कुल ठीक हो गयी| ठीक होने पर भी मोहम्मदजी ने उसे कहा ‘और कोई सहायता लगे तो जरुर याद करना’| ये शब्द सुनते ही उस वृद्धा की आखें भर आयी| आत्मग्लानी का एहसास उसे हुआ और वह माफी माँगने लगी| मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा ‘कोई बात नहीं, आगे से सभी के साथ अच्छा व्यवहार करो’ ये कहकर चले गये|
इस घटना से हमें ये सीख मिलती है कि क्षमा करना ये कोई कायरता नहीं परंतु यह वीरता हैं| जैसे क्राइस्ट, उनका जीवन भी हमारे सामने एक प्रेरणात्मक मिसाल हैं| जब उनके शरीर में खिले ठोके गए तब भी उनके अन्दर से यही क्षमाभाव के बोल थे ‘भगवान, इन्हें क्षमा कर देना, ये अन्जान है, इन्हें क्षमा कर देना…….’ आज भी इस दृश्य को महसूस करते है तो रौंगटे खड़े हो जाते है कि नफरत की चरमसीमा को पर किए हुए लोगों के अत्याचार को सह कर भी, किसी के दिल से क्षमा की सुगंधी भावना उदित हो सकती है? महान आत्माओं का यही तो आभूषण हैं|
हम जो औरों को देते है वही हमारे पास आता हैं| दुनिया कहती है ‘Tit for Tat, इट का जवाब पत्थर से’ परंतु ‘अपकारियों पर उपकार करना’ हमें सीखना है| कोई कितना भी गलत हो परंतु हमें उनको क्षमा करना है| उनकी बातों को चित्त पर न रख आगे बढ़ते जाना है|

ओम शान्ति

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8 Comments

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