अदृश्य सत्य

मन में संकल्पों का प्रवाह बहता रहता है | इस बहाव को प्रकम्पन भी कहते है | इन प्रकम्पनों के लिए समय,स्थान, की मर्यादा नहीं | किसी व्यक्ति के बारे में हम सोचते है, अगर वह सोच शक्तिशाली है तो उसका प्रभाव दूर बैठे व्यक्ति पर भी पड़ता है | जिसे हम telepathy भी कहते है | हम किस के बारे में क्या सोच रहे है उसका पता कोई लगा नहीं सकता | परंतु ये विचारों के प्रकम्पन उस व्यक्ति के पास पहुँच जाते है|
संकल्पों की ऊर्जा बाहर निकालने के तीन द्वार है – आँखे , हाथ और पैर | जैसे शरीर में जमा हुआ मैल त्वचा द्वारा निकालता है वैसे यह ऊर्जा ( negative या positive) इन तीन स्थानों से निकलती है |
आँखे :-
शरीर में सब से सुंदर हमारा चेहरा है और उस में भी हमारी आँखे महत्वपूर्ण होती है | कहते है ‘ आँखे भी होती है दिल की जुबान, बिन बोले कर देती है, हालत ये पल में बयान ’ आँखों में संकल्पों का संसार देख सकते है | आँखे मन की भावनाओं का दर्शन कराती है | किसी के प्रति प्यार, क्रोध, लोभ, वासनाए सब इन में दिखाई देता है | क्रोध में आँखे लाल होती है, दुःख में आँखे रोती है , आश्चर्य में आँखे बड़ी होती है ….. आँखों से अलग-अलग भाव स्वत: ही निकलते है | आँखों से निकलनेवाली ये ऊर्जा एक से दूसरे की तरफ transfer होती है | बारिश के दिनों में जब आँखे लाल होती है| अगर उन आँखों में कोई आँखे डालकर देखे तो उसकी भी आँखे लाल हो जाती है, यह तो बिमारी की बात है | परंतु आँखों से प्यार की ऊर्जा, क्रोध की ऊर्जा औरों को feel जरूर होती है |
दुनिया में hypnotise करने के लिए भी आँखों का प्रयोग किया जाता है | आँखे शरीर की एक इंद्रिया है, इन से देखा जाता है परंतु इन से निकलने वाले भाव अदृश्य है | वह प्रकम्पन है | इन्हे महसूस किया जाता है |
हाथ :-
हाथों से हमारे कई कार्य किए जाते है | दान करना, आशीर्वाद देना, भोजन बनाना-खिलाना, पूजा करना….. यह सारे कर्म है परंतु इसके पिछे के भाव अगर श्रेष्ठ है, तो उसका फल भी श्रेष्ठ प्राप्त होता है | मन में उठने वाले संकल्प हाथों द्वारा वायब्रेशन के रूप में बाहर निकलते है | इसलिए स्पर्श का बड़ा महत्व होता है | जैसे छोटे बच्चे को अपनी माँ की पहचान देनी नहीं पड़ती उसके स्पर्श से ही वह जान जाता है | एक प्राणी भी स्पर्श से अपने और पराए का भेद समझ सकता है | मात-पिता के आशीर्वाद का हाथ सिर पर रखने से शक्ति मिलती है | किसी के हाथ का भोजन बहुत स्वादिष्ट लगता है तब हम कहते भी है कि इनके हाथों में जादू है |
कहते है ‘ जैसा अन्न वैसा मन और जैसा मन वैसा अन्न ’ | अन्न का प्रभाव मनपर और मन का प्रभाव अन्न पर पड़ता है | भोजन बनाते वक्त विचारों का महत्व ध्यान में रखते हुए, प्रभु की याद में बनाए तो उसका स्वाद ही बदल जाता है | कुछ लोगों की मान्यता है कि बिना मसालों के भोजन में स्वाद नहीं आता | मसालों का स्वाद अलग चीज है लेकिन उसके साथ विचारों का मसाला भी अन्न पर प्रभाव डालता है | इसलिए एक जैसी पद्धती, पदार्थ का इस्तमाल करने के बावजूद भी स्वाद में अन्तर आ जाता है |
जिन विचारों से भोजन बनता है वैसे ही खाने वाले की भी सोच बनती है इसलिए भोजन बनने के बाद अन्न शुद्धी के लिए भोग लगाया जाता है | जिससे व्यर्थ, negative विचारों के कीटाणु भस्म हो जाए | जैसे सूर्य की किरणे (कोसो दूर होते हुए भी) इतनी शक्तिशाली होती है कि वातावरण के कीटाणु नष्ट हो जाते है वैसे ही परमात्म किरणे भी अन्न को पवित्र बनाती है | खुद भोजन स्वीकार करने के पहले भगवान को वह स्वीकार कराए | विचारों का यह प्रभाव अदृश्य है परंतु जो मन की अवस्था उसके बाद बनती या बिगड़ती है वह महसूस होता है |
पैर :-
भक्ति में महात्माओं के चरण अपने घर पड़े उसका महत्त्व होता है | चरणस्पर्श करना, किसी के कदम घर में पड़ना उसका महत्व है अर्थात विचारों की धारा पैरों से भी प्रवाहीत होती है, वह vibration हमारे साथ औरों तक पहुँचते है | मंदिर में देवताओं का दर्शन करने जाते है तो उनके चेहरे में नैनों को देखते है, हाथों से मिलते हुए आशीर्वाद को लेते है और चरणस्पर्श कर शक्ति स्वीकार करते है | चरणों से उनकी शक्तियाँ मुझे प्राप्त होती है अर्थात उनके स्पंदन मुझ मे आ जाते है |
दुनिया में यह भी मान्यता है कि किसी व्यक्ति के घर में कदम रखने से या आने से धन या सुखों की वृद्धी होती है, या फिर बहुत नुकसान होता है | उसके आधार पर वह व्यक्ति मेरे लिए lucky या unlucky माना जाता है |
विचारों के ये तीन द्वार दिखाई देते है परंतु विचारों के प्रकम्पन दिखाई नहीं देते, वह अदृश्य होते हुए भी बहुत प्रभावशाली है | इनके परिणाम जीवन में दिखाई देते है|हम कई बार समझ नहीं पाते की ऐसा क्यों हो रहा लेकिन संकल्पों के परिणामो से जागृत रहेंगे तो उसका उपयोग सही रीती से कर सकेंगे|

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16 Comments

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